BHAGWAN BABU 'SHAJAR'

HAQIQAT

113 Posts

1863 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 940 postid : 687334

रंग-ए-मोहब्बत- Contest

Posted On: 15 Jan, 2014 कविता,Contest,Hindi Sahitya में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

अब रंग-ए-मोहब्बत, बेअमल हो रहे है।
मज़हबी दंगे यहाँ, आजकल हो रहे है।
————————————–
माँग धुलने की अब, कोई नहीं है निशाँ
गोया धन्धे में, अदल-ओ-बदल हो रहे है।
—————————————
किसकी थी आरज़ू, ये फिक़्र उसका नही,
हसरतें कैसी भी हों, मुक्कमल हो रहे है।
————————————–
कल तक तो थी, उनकी यहीं झोपड़ी,
किया ऐसा क्या, जो वो महल हो रहे है।
—————————————-
दो पल भी भरोसा, न होता किसी का,
मगर खड़े उनको, यहाँ अज़ल हो रहे है।
—————————————-
अच्छी बातें न दिखती, है नित होते हुए,
उनकी तो बस कहानी, ग़ज़ल हो रहे है।
—————————————–
बदल गये है जमाने, देख ले ऐ “शजर”,
ऐन-ए-वस्ल में, अब ओझल हो रहे है।



Tags:         

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

20 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka के द्वारा
January 25, 2014

सुन्दर व् सामयिक गजल .. बधाई ..

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 26, 2014

    अल्का जी .. आपका धन्यवाद..

anilkumar के द्वारा
January 19, 2014

प्रिय भगवान बाबू , बहुत सुन्दर रचना । बधाई ।

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 20, 2014

    आपका धन्यवाद… हौसला बढ़ाने के लिए…

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 19, 2014

बिलकुल नियमानुकूल और सटीक ग़ज़ल ! बधाई !

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 20, 2014

    गुंजन जी… ये वही ग़ज़ल है जिसे आपने सुधार करने को कहा था…. अब आपको सटीक लग रहा है … फिर और हमें क्या चाहिए.. हमें चाहिए था कि कोई मेरी गलती को बताये और मै सही करूँ… आपका बहुत बहुत धन्यवाद…

yamunapathak के द्वारा
January 19, 2014

कल तक…महल हो रहे हैं भगवान बाबूजी बहुत ही उम्दा ग़ज़ल है…..

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 19, 2014

    आपकी हौसलाफजाई से हम गद्गद हो गये… उम्मीद करते है आप इसी तरह साथ देते रहेंगे… आपका धन्यवाद…

yatindranathchaturvedi के द्वारा
January 18, 2014

अद्भुत, सादर

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 19, 2014

    बहुत बहुत शुक्रिया यतीन्द्रनाथ जी….

vaidya surenderpal के द्वारा
January 18, 2014

सुन्दर व सार्थक रचना।

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 19, 2014

    आपका धन्यवाद…

jlsingh के द्वारा
January 18, 2014

कल तक तो थी, उनकी यहीं झोपड़ी, किया ऐसा क्या, जो वो महल हो रहे है। सर जी ये तो चमत्कार ही हो रहा है जो विप्र सुदामा जी के साथ हुआ था. अच्छी गजल प्रस्तुति के लिए बधाई!

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 19, 2014

    आपका तहे-दिल से शुक्रिया… हमेशा साथ देने के लिए… वो तो सुदामा जी थे… लेकिन आजकल तो रातों-रात महल बना लिए जाते है … आपने देखा भी होगा…

विनय सक्सेना के द्वारा
January 18, 2014

समसामयिक निहितार्थ लिए हुए सुंदर रचना ….बधाई ………विनय सक्सेना “रिमझिम फुहार”

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 19, 2014

    अपना कीमती समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद….

harirawat के द्वारा
January 15, 2014

बहुत दिनों बाद आपकी कविता पढ़ने को मिली ! सुंदर सार्थक दिशा निर्देशन के लिए बधाई ! हरेन्द्र जागते रहो !

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 16, 2014

    आदरणीय हरेन्द्र जी…. आप इसी तरह मेरे ब्लॉग पर आते रहिए और कविता पढ़कर मुझे एक अच्छा सा सुझाव देते रहिए… आपका धन्यवाद…

nishamittal के द्वारा
January 15, 2014

सुन्दर प्रस्तुति

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 16, 2014

    आपका बहुत बहुत धन्यवाद… जो आपने मेरा हौसला बढ़ाया आज..


topic of the week



latest from jagran