BHAGWAN BABU 'SHAJAR'

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गुनाह - Contest

Posted On: 16 Jan, 2014 कविता,Contest,Hindi Sahitya में

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हो जाए अगर दिल से कोई गुनाह तो
क्या कीजिए फिर मांगे वो पनाह तो
—————————————–
सौदाई जहाँ मे किससे पूछे राह कोई
हैरत नही गर हो जाये यहाँ बेराह तो
————————————
अपने गुमां से हर कोई महदूद है वर्ना
क्या बुरा होगा गर चले सभी हमाह तो
——————————————–
कैसे जाने पास रहते है अहल-ए-ख़िरद
जब काम ही न आये कभी नवाह तो
————————————
तोड़ कर दिल को वो खुश होते है
क्या कहूँ गर नाम देते वो फराह तो
——————————–
वाइज़ ही कर दे मुहाल जीना तो क्या हो
गर करे कोई मोहब्बत बेपनाह तो
————————————-
सहर से ही शहर में तरस है दाने की
परिन्दे फिर क्या करे ढले जो पगाह तो
————————————–
क्या होगा ‘शजर’ फिर उनके पास जाकर
जब निकल ही जाए दिल से दर्द-ए-आह तो
————————–
.
अर्थ -
गुनाह – दोष , पनाह – शरण, सौदाई – व्यापारिक, हैरत – आश्चर्य, बेराह – दिशाहीन, गुमां – अहंकार, महदूद – बन्धन, हमाह – साथ साथ, अहल-ए-खिरद – (लोग ) ज्ञानी लोग , नवाह – पडोस , फराह – मनोरंजन, वाइज़ – धर्म-गुरू, सहर- सुबह, पगाह- साँझ



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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

shiv kumar के द्वारा
January 22, 2014

Tanhai mein ajeeb zamaney ki wafa dekhta raha Umer bhar apna ghar tanha dekhta raha Kahin na kahin to badal hi jatay hain silsilay Magar main jahan gaya sehra dekhta raha Jane kyun qatratay hain log mujhe milne say Kal shab dair talak aaina dekhta raha Pani mangte magte meray honth pathar ho gaye Woh shaks mashkiza liye khara dekhta raha Be-gunah tha phir bhi sir jhukaye hue Sitam-gar ki sitam ki inteha dekhta raha Umar bhar mohabbat ka kuch youn silsila raha Main usay or woh duniya dekhta raha

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 23, 2014

    धन्यवाद शिव.. इसे अगर हिन्दी मे लिख देते तो … पढ़ने में जरा आसानी होती…

yogi sarswat के द्वारा
January 22, 2014

तोड़ कर दिल को वो खुश होते है क्या कहूँ गर नाम देते वो फराह तो ——————————– वाइज़ ही कर दे मुहाल जीना तो क्या हो गर करे कोई मोहब्बत बेपनाह तो ————————————- सहर से ही शहर में तरस है दाने की परिन्दे फिर क्या करे ढले जो पगाह तो बहुत सुन्दर शब्द श्री सज़र साब !

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 23, 2014

    शुक्रिया जनाब… योगी जी… बहुत बहुत शुक्रिया…

aman kumar के द्वारा
January 22, 2014

बहुत सुंदर , रचना मजा आ गया ……

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 23, 2014

    शुक्रिया अमन जी…

yatindrapandey के द्वारा
January 21, 2014

हैलो सर आपकी रचनाये बिलकुल अलग होती मई बेहद पसंद करता हु आपकी कुछ रचनाये जो पिछले कुछ दिनों कि आपकी रचनाये ■दर्द-ए-दिल ■रंग-ए-मोहब्बत ■जरा धीरे चलना बेहद पसंद आयी मुझे आभार स्वीकार करे यतीन्द्र

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 22, 2014

    यतीन्द्र जी … ये मेरा सौभाग्य है कि मेरी रचनाएँ आप जैसे कुछ लोगो को पसन्द आ जाती है…. आप लोगो को पसन्द आती है … ये जब मुझे आपलोगो के द्वारा पता चलता है तो और भी लिखने का जनून हो जाता है… तो आपसभी अपनी प्रतिक्रिया देकर मेरा मार्गदर्शन करते रहे… जिससे कि मै आगे बढ़ सकूँ,… आपका धन्यवाद…

vaidya surenderpal के द्वारा
January 21, 2014

खूबसूरत गज़ल…।

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 21, 2014

    तहे दिल से शुक्रिया… सुरेन्द्रपाल जी..

सौरभ मिश्र के द्वारा
January 20, 2014

बहुत सुन्दर

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 20, 2014

    शुक्रिया सौरभ जी…

January 19, 2014

बेहतरीन .

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 20, 2014

    शालिनी जी… मूल्यांकन के लिए आपका धन्यवाद…

jlsingh के द्वारा
January 19, 2014

बहुत ही लजीज (पता नहीं लजीज उपयुक्त है या नहीं – यह आप ही जाने) मगर है यह दिलअज़ीज (प्यारा सा) शुभकामनाओं के साथ! भगवान बाबू!!

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 20, 2014

    हा हा हा हा… अब रहने दीजिए.. बहुत तारीफ कर दी आपने… बस कीजिए…

yamunapathak के द्वारा
January 19, 2014

इतने सारे उर्दू लब्ज़ बहुत खूबसूरत है

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 19, 2014

    ये सब आपलोगो के प्यार और स्नेह से ही सम्भव हो पाता है … आपका धन्यवाद..

sadguruji के द्वारा
January 19, 2014

तोड़ कर दिल को वो खुश होते है क्या कहूँ गर नाम देते वो फराह तो,बहुत अच्छी ग़ज़ल,बधाई.

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 19, 2014

    काफी दिनो बाद आपकी प्रतिक्रिया पाकर मै खुश हुआ… आपका धन्यवाद… अपना कीमती समय देने के लिए..

deepak के द्वारा
January 16, 2014

बहुत खुब सरजी

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 19, 2014

    शुक्रिया दीपक…


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