BHAGWAN BABU 'SHAJAR'

HAQIQAT

118 Posts

2129 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 940 postid : 691232

दर्द-ए-दिल - Contest

Posted On: 21 Jan, 2014 कविता,Contest,Hindi Sahitya में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मुझे दर्द-ए-दिल की वो दवा दे देते
जिन्दगी मेरी हो जाती दुआ दे देते

सोचता कहाँ हूँ और जाता कहाँ हूँ
दीद-ए-मुक्कदर को शमा दे देते 

जल ही रहा हूँ न बुझ ही रहा हूँ
मुझपे एक रहम की हवा दे देते 

वीरान राहों का तन्हा मैं राही हूँ
दम-ए-आख़िरत इश्क़-ए-रहनुमा दे देते 

फ़रमान देने का बहुत शौक़ है उन्हें
मुझ दीवाने को शौक़-ए-सज़ा दे देते

कर लेगा “शजर” हर गुनाह-ए-क़ुबूल
अगर साथ मरने की वो जुबां दे देते


Tags:       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (4 votes, average: 3.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

13 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Pushpendra Singh के द्वारा
May 28, 2014

very nice sir dil khush ho gaya

OM DIKSHIT के द्वारा
January 26, 2014

भगवान बाबू ,नमस्कार. लिखने की शैली अच्छी लगी.

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 27, 2014

    दीक्षित जी नमस्कार…. आपका धन्यवाद … जो आपने अपनी प्रतिक्रिया दी … मेरी कोई दूसरी ग़ज़ल को भी पढ़ के देखिये… .. आपका पुनः धन्यवाद…

सौरभ मिश्र के द्वारा
January 26, 2014

जो भी आपने गज़ल मे मागा वो शायद ही किसी को मिल पाये पर बहुत उम्दा गज़ल

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 26, 2014

    आपका बहुत बहुत धन्यवाद …

shiv kumar के द्वारा
January 22, 2014

बहुत बढ़िया Tere jane k baad kuch ajeeb si kahani meri, Na koi zakhm na koi nishani teri. Har koi puchta hain mujhse, Kaha gayi woh dewaani teri, Bas has kar ye jawab de jata hu, Woh thi ek ansuni kahani meri, Har raat meri tanhayi pucha karti hain Kaha gayi woh pagli si dewaani teri, Aur main bas yahi keh pata hu, Woh hain ek adhuri kahani मेरी.

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 23, 2014

    शुक्रिया शिव… हिन्दी में लिखा करो… जल्दी समझ में आयेगा…

jlsingh के द्वारा
January 22, 2014

फ़रमान देने का बहुत शौक़ है उन्हें मुझ दीवाने को शौक़-ए-सज़ा दे देते प्रिय बाबू, अच्छी रचना है … लिखते रहें…

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 23, 2014

    धन्यवाद जवाहर जी…. आपकी प्रतिक्रिया का हमेशा इंतजार रहता है…..

deepak के द्वारा
January 21, 2014

बहुत खुब सर जी

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 22, 2014

    शुक्रिया दीपक…

keshav kumar के द्वारा
January 21, 2014

ye gajal kamal ka h sir ji

    Bhagwan Babu Shajar के द्वारा
    January 22, 2014

    धन्यवाद केशव कुमार… एक ओजपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए…


topic of the week



latest from jagran